संसदीय सचिव मामले में आम आदमी पहुंची हाई कोर्ट

20 एमएलए की सदस्यता रद्द होने की आशंका के बीच आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग की सुनवाई को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दे दी है। हाई कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने आयोग को 21 नवंबर तक जवाब मांगा है। आप एमएलए का कहना है कि चुनाव आयोग को इस मामले में सुनवाई करने का अधिकार नहीं है। यही तर्क इन एमएलए ने चुनाव आयोग के सामने भी दिया था लेकिन चुनाव आयोग ने इस तर्क को नामंजूर कर दिया था।
दिल्ली के 21 एमएलए को मार्च 2015 में सातों मंत्रियों का संसदीय सचिव बनाया गया था। इसे एक वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति से शिकायत की कि यह सब गैर कानूनी तरीके से किया गया है। उनका कहना था कि दिल्ली में मंत्रियों के संसदीय सचिव नहीं बनाए जा सकते। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि संसदीय सचिव का पद लाभ के पद के दायरे में आता है। इसलिए इन एमएलए की सदस्यता रद्द कर दी जाए। राष्ट्रपति ने इस मामले में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण देने के लिए कहा। चुनाव आयोग तब से इस मामले की सुनवाई कर रहा है। बाद में इनमें से एक एमएलए जरनैल सिंह ने पंजाब से चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इस तरह इन एमएलए की संख्या 20 रह गई।
इसी बीच पिछले साल दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि इन एमएलए को संसदीय सचिव बनाना गैरकानूनी है और कोर्ट ने इनकी नियुक्ति रद्द कर दी। इन एमएलए ने चुनाव आयोग के सामने तर्क दिया कि जब नियुक्ति गैरकानूनी कर दी गई है और संसदीय सचिव पद से हटा दिया गया है तो फिर चुनाव आयोग की सुनवाई का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने चुनाव आयोग से मामला ही खत्म करने के लिए कहा था लेकिन चुनाव आयोग तैयार नहीं हुआ। इन एमएलए में चार पूर्वी दिल्ली से हैं। वे हैं नितिन त्यागी, मनोज कुमार, अनिल वाजपेयी और सरिता सिंह।
अब इन एमएलए के हाईकोर्ट में जाने और 21 नवंबर को तारीख दिए जाने से यह माना जा रहा है कि अब मामला और भी लटक जाएगा और इस बीच चुनाव आयोग इस मामले पर फैसला नहीं दे पाएगा।

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