सरकार की सारी उम्मीदों पर पानी फिरता जा रहा है।

 

पिछले साल नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की थी तो सरकार ने कई उम्मीदें बांधी थीं लेकिन अब पता चल रहा है कि सरकार की सारी उम्मीदों पर पानी फिरता जा रहा है। अब यह सच्चाई भी सामने आ गई है कि सरकार नोटबंदी के बाद डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर जिस तरह जोर दे रही थीवह योजना भी कामयाब नहीं हो सकी। पिछले साल नवंबर से लेकर अब मई तक प्लास्टिक मनी यानी डेबिट और क्रेडिट कार्ड से लेन-देन सिर्फ सात फीसदी ही बढ़ सका है। हालांकि कैशलैस के दूसरे तरीके भी इस्तेमाल किए गए जिससे कुल डिजिटल लेनदेन एक वक्त23 फीसदी तक बढ़ गया था लेकिन डेबिट और क्रेडिट कार्ड से लेनदेन पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। यह सच्चाई वित्त मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी के सामने कई मंत्रालयों के प्रेजेंटेशन से सामने आई है। नवंबर 2016 से इस साल मई तक कुल मिलाकर करोड़75 लाख लेनदेन हुए जो नवंबर में करोड़24 लाख थे। वैसेलोगों ने इलेक्ट्रोनिक फंड ट्रांसफर किया और बैंक एकाउंट्स से भी पैसा इधर से उधर किया लेकिन अपने पास कैश रखने की बजाय कार्ड रखने की लोगों की आदत नहीं बदली। लोग अब भी कैश में ही भुगतान कर रहे हैं।

वैसेसरकार ने कहा था कि नोटबंदी से करप्शन पर रोक लगेगीजाली करंसी खत्म होगी और आतंकवाद भी रुकेगा। उस मामले में भी लोगों को ज्यादा बदलाव नजर नहीं आया। अब सरकार यह भी बता पाने की हालत में नहीं है कि नोटबंदी के बाद कुल कितनी नकदी वापस आई। रिजर्व बैंक ने खुद मान लिया है कि अब नकदी की गिनती ही नहीं हुई है। इसके लिए मशीनों का इंतजाम किया जा रहा है।

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